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Showing posts from July, 2015

Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: Meri Dun...

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पानी पूरी वाला



शहर के मुख्य चौराहे पर

ठीक फुटपाथ पर

ले ढकेल वह रोज

खड़ा होता था

लोगो को अपनी बारी

का इन्तजार रहता

जब कभी गुजरना होता

घर से बाहर

मैं भी नहीं भूलती

खाना पानी पूरी

बस पानी पूरी

खाते खाते

आत्मीयता सी हो

गई थी मुझे

जब कभी मेरा

जाना होता

तो वह भी कहने से

ना चूकता था

आज बहुत दिन बाद-----



वक्त बीतता गया

जीवन का क्रम चलता रहा

अनायास एक दिन वह

फेक्चर का शिकार

हो गया

तदन्तर अस्पताल में

सुविधाएं भी पैसे वालों के

लिए होती है ---------

पर वो बेचारा

जैसे तैसे ठीक हुआ

बीमारी ने आ घेरा

एक दिन बस शून्य में

देखते ही देखते

काल कवलित

हो गया

फिर बस केवल

संवेदनाएं ही संवेदना

     बस स़बेदना

बची सबकी



जीवन का करूणांत

तदन्तर

आत्मनिर्भर परिवारिक जनों की

दो रोज की रोटी ने

एक गहरी चिंतन रेखा

खींच दी



पर मैं और मेरी

आत्मीयता बाकी है

आज भी

क्योंकि व्यक्ति जाता है

जहां से

उसकी नेकी लगाव

आसक्ति…

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रूह एक दिन बदन से निकल जायेगी

बस यूँ ही तकदीर  सभल जायेगी



किरण आसमा बन लपट जलं जायेगी

नीचे वालों की क्यूं  याद कल जायेगी



नदियाँ बह चट्टान में बदल जायेगी

हिमालय की गोद फिर  छल जायेगी



जेहन मे छुपी चाह यूँ ही टल जायेगी

जब तेरी पोल फिर से  खुल जायेगी



खामोशियाँ कुछ कह उछल जायेगी

हिचकियाँ  जब तलक मचल जायेगी



एक दिन खुदा की खुदाई चल जायेगी

जब वह तुझे फिर से मिल जायेगी



यूँ आस फिर मिलन की मधु पल जायेगी

जब हवा जमाने की फिर बहल जायेगी

Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: Meri Dun...

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रूह एक दिन बदन से निकल जायेगी

बस यूँ ही तकदीर  सभल जायेगी



किरण आसमा बन लपट जलं जायेगी

नीचे वालों की क्यूं  याद कल जायेगी



नदियाँ बह चट्टान में बदल जायेगी

हिमालय की गोद फिर  छल जायेगी



जेहन मे छुपी चाह यूँ ही टल जायेगी

जब तेरी पोल फिर से  खुल जायेगी



खामोशियाँ कुछ कह उछल जायेगी

हिचकियाँ  जब तलक मचल जायेगी



एक दिन खुदा की खुदाई चल जायेगी

जब वह तुझे फिर से मिल जायेगी



यूँ आस फिर मिलन की मधु पल जायेगी

जब हवा जमाने की फिर बहल जायेगी

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Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: जन्म उत्...

Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: जन्म उत्...: Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: जन्म उत्सव के दिन एक ए... : Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: जन्म उत्सव के दिन एक एक करके मैं सजा... : ...






























Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: जन्म उत्सव के दिन एक एक करके मैं सजा...

Meri DuniyaN: Meri DuniyaN: जन्म उत्सव के दिन एक एक करके मैं सजा...: Meri DuniyaN:



इंसानियत सरेआम नीलाम होती

वो दुकान शायद मुझमें  ही है



साँझ पक्षी वापस घर लौटते है

वो घोसला शायद मुझमें ही है



सावन के मास सूने सूने से होते

वो झूले शायद मुझमे ही  है



हर कदम पर कमीनापन दिखता

वो इन्साफ शायद  मुझमे ही है



राजनीति गलियारा गन्दा दिखता

वो सफेदा शायद मझमें ही है